निम्नलिखित का भाव स्पष्ट कीजिए-

रहिमन मूलहिं सीचिबों, फूलै फलै अघाय।

इस पंक्ति का अर्थ है जिस तरह पौधे की जड़ को सींचने से हमें फूल और फल प्राप्त होते हैं, उसी तरह एक ईश्वर की साधना करने से हम संसारिक सुख की प्राप्त कर सकते हैं। हमें अनेक देवी-देवताओं में आस्था रखने की बजाये एक ईश्वर के प्रति सच्चे मन से आस्था रखनी चाहिए। इससे निश्चित ही हमें लक्ष्य की प्राप्ति होगी और हम कर्तव्य के मार्ग से भी नहीं भटकेंगे।


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